नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस बीच जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने सारण में एक जनसभा को संबोधित करते हुए साफ कहा कि वे मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में नहीं हैं, बल्कि बिहार के विकास का सपना लेकर आगे बढ़ रहे हैं।
“मैंने 10 मुख्यमंत्री बनाए, खुद बनने की मंशा नहीं”
प्रशांत किशोर ने कहा, “कुछ लोग कह रहे हैं कि मैं सीएम बनना चाहता हूं। लेकिन सच्चाई ये है कि मैंने देश में 10 से ज्यादा मुख्यमंत्रियों को बनाने में मेहनत की है। मैं सीएम बनने नहीं, बल्कि बिहार को बदलने के मिशन पर हूं।
“बिहार तब बदलेगा जब लोग यहां रोजगार खोजने आएंगे”
जनसुराज नेता ने कहा कि बिहार का असली विकास तब माना जाएगा जब लोग हरियाणा, पंजाब और गुजरात से बिहार में रोजगार की तलाश में आएंगे। उन्होंने कहा, “अब तक बिहार से लोग बाहर जाते हैं, मैं चाहता हूं बाहर से लोग यहां आएं।
नीतीश कुमार के गांव में जाने से रोका गया
प्रशांत किशोर नालंदा के कल्याण बिगहा गांव जाना चाहते थे, जो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गांव है। लेकिन प्रशासन ने उन्हें वहां जाने से रोक दिया। इस पर नाराज प्रशांत किशोर ने कहा, “लोगों ने मुझे बताया कि गांव में भ्रष्टाचार है और योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा। जब मैं गांव जाना चाहता हूं तो ऊपर से आदेश आता है कि नहीं जा सकते। ये कैसी लोकतंत्र की परंपरा है?” प्रशांत किशोर ने नीतीश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “राज्य में अफसरशाही हावी हो गई है। कोई नेता जनता से नहीं डरता, अफसरों से डरता है। अगर नीतीश कुमार ने बिहार के एक गांव में सड़क बना दी है, तो ऐसी सड़कें पूरे राज्य में क्यों नहीं बनीं? क्या यह विकास का मॉडल है? प्रशांत किशोर की जनसभाएं और बेबाक बयानबाजी साफ दिखाते हैं कि वे बिहार में बदलाव के बड़े एजेंडे पर काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उनकी लड़ाई पद या कुर्सी के लिए नहीं, बल्कि नीति और नीयत के बदलाव के लिए है। विधानसभा चुनाव से पहले उनका यह रुख प्रदेश की राजनीति में एक अहम मोड़ ला सकता है।





